ओडिशा कॉलेज छात्रा की आत्मदाह की दर्दनाक घटना: यौन उत्पीड़न और प्रशासन की चुप्पी
तारीख: 13 जुलाई 2025
ओडिशा के बालासोर जिले में स्थित फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज में बीते दिनों एक दर्दनाक घटना घटी जब एक कॉलेज छात्रा ने यौन एवं मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करने के बाद आत्मदाह की कोशिश की। यह घटना न केवल कॉलेज परिसर की सुरक्षा और शिकायत निवारण प्रणाली पर सवाल खड़े करती है बल्कि देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में महिला छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर भी गंभीर चेतावनी है।
🔥 आत्मदाह की घटना और कारण
30 जून 2025 को सौमाश्री बिसी, जो कि बी.एड. के दूसरे वर्ष की छात्रा हैं, ने अपने विभागाध्यक्ष (HOD) के खिलाफ यौन एवं मानसिक उत्पीड़न की लिखित शिकायत कॉलेज प्रशासन को सौंपा था। आरोप है कि विभागाध्यक्ष ने छात्रा को एसकॉर्डर भेजकर परीक्षा पास कराने का प्रलोभन दिया और जब छात्रा ने इन असामाजिक मांगों को ठुकराया तो धमकियाँ मिलने लगीं।
13 जुलाई को कॉलेज परिसर में, एक सप्ताह से चल रहे धरने के बाद, प्राचार्य कार्यालय के बाहर, छात्रा ने पेट्रोल डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया। यह क़दम छात्रा की ओर से प्रताड़ना और प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ अंतिम चेतावनी था।
🏥 गंभीर स्थिति और चिकित्सा व्यवस्था
छात्रा को 90% जलने की गंभीर चोट के साथ भुवनेश्वर के AIIMS के ICU में भर्ती कराया गया है। साथ ही, एक अन्य छात्र, जो आग बुझाने की कोशिश में झुलस गया, उसकी हालत भी नाजुक बताई जा रही है। अस्पताल में उनकी देखभाल के लिए 12 सदस्यों का विशेषज्ञ चिकित्सक दल गठित किया गया है।
👮 गिरफ्तारी और प्रशासनिक कदम
आरोपी विभागाध्यक्ष को गिरफ्तार कर दिया गया है। उस पर यौन उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही कॉलेज के प्रिंसिपल को निलंबित किया गया क्योंकि वे शिकायतों का उचित जवाब देने में विफल रहे। ओडिशा सरकार ने उच्च स्तरीय जांच कमिटी गठित कर मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।
🏛️ सरकारी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
ओडिशा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने इस घटना की जांच के लिए ICC, महिला अधिकारी और प्रशासनिक सदस्यों को शामिल करते हुए विशेष कमिटी बनाई है। विधायक प्रताप सारंगी ने कॉलेज प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि छात्राओं की सुरक्षा में गंभीर चूक हुई है। शैक्षणिक विशेषज्ञ भी शिकायत निवारण प्रणाली की विफलता को मुख्य कारण मानते हैं।
📌 क्या यह पहली घटना है?
इस साल फरवरी में भी KIIT, भुवनेश्वर में नेपाली छात्रा प्रकृति लम्साल की आत्महत्या हुई थी, जो इसी तरह के यौन उत्पीड़न और मानसिक दबाव का शिकार थी। इससे पहले भी देश के कई हिस्सों में छात्राओं और छात्रों की शैक्षणिक दबाव, फीस एवं मानसिक उत्पीड़न की वजह से आत्महत्या की घटनाएं हुई हैं।
🧭 घटना का व्यापक महत्व
यह घटना शिक्षा संस्थानों में महिला छात्राओं की सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है। ICC (Internal Complaints Committee) की भूमिका को प्रभावी बनाना, शिकायत निवारण प्रक्रिया को मजबूत करना और संस्थागत जवाबदेही को सख्त बनाना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। यही नहीं, यह देश के सभी शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा तंत्र के सुधार की मांग करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
✅ निष्कर्ष
ओडिशा कॉलेज छात्रा की आत्मदाह की कोशिश एक चेतावनी है कि यौन उत्पीड़न, प्रशासन की उदासीनता और शिकायतों की अनदेखी के खिलाफ अब और कार्रवाई आवश्यक है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना ही भविष्य की पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान कर सकता है।
लेखक: Shubham Pathak
प्रकाशित: The Awaaz India — https://theawaazindia.blogspot.com
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