रविवार, 22 जून 2025

जय या मरण: प्रेरणादायक संघर्ष कविता | Awaaz India


जय या मरण: प्रेरणादायक संघर्ष कविता

संघर्ष और प्रेरणा से भरी हिंदी कविता – जय या मरण


लेखक: शुभम पाठक

जय या मरण, बस एक ही विकल्प है,
आराम हुआ खत्म, समय बहुत अल्प है।
अब थमना मना है, हर सांस में रण की पुकार है,
रणभेरी बज चुकी, अब युद्ध ही विचार है।

उबाल है लहू में, दिल में तूफ़ान है,
बिजलियाँ बरसें ऐसी आँखों में जान है।
धरती का कर्ज़ है सीने पर लिखा,
अब हर कदम मेरा एक युद्ध घोष है सधा।

पीछे हटना अब पाप समान होगा,
डगमगाए जो, वो नाम बदनाम होगा।
जीत की खातिर सब कुछ हो समर्पित,
स्वाभिमान अब तलवार के काम होगा।

ना मैं झुकूंगा, ना मिट्टी में मिलूंगा,
जंगलों से, तूफानों से टकरा चलूंगा।
लक्ष्य नहीं देखा कभी पीछे मुड़ कर,
शपथ है मेरी — मैं अंत तक लडूंगा।

जय या मरण, यही अब रण का धर्म है,
जीत की राह में ही मेरा कर्म है।

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