गुरुवार, 19 जून 2025

सुबह की पहली किरण




सुबह की पहली किरण, जब आंखों से टकराई,  

मन में एक उम्मीद की रेखा सी खिंच आई।  

चुपचाप सा था दिल, मगर उजाले ने कहा,  

"आज भी तेरे लिए कुछ नया लिखा गया।"


हर एक किरण में छुपा है संदेश कोई,  

बीते हुए कल से आगे बढ़ने का विनय कोई।  

तारों की चुप्पी के बाद जो ये उजास है,  

वो बताता है — अंधेरा भी एक इतिहास है।


चलो उठो, नए ख्वाबों की खोज करें,  

जो अधूरे रह गए, उन्हें आज पूरा सोच लें।  

सुबह की पहली किरण यही सिखा गई,  

जिनमें हौसला है, वही नई सुबह बना गई।


~ शुभम पाठक


शीर्षक: ब्लॉग के बारे में


"Subah Ki Pehli Kiran" केवल एक कविता नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सफर है — शब्दों का, एहसासों का, और उन पलों का जो हम अक्सर महसूस तो करते हैं लेकिन कह नहीं पाते।


यहाँ हर कविता सुबह की एक नयी किरण की तरह है — जो कभी उम्मीद जगाती है, कभी सच्चाई से रूबरू कराती है, और कभी दिल के कोनों में छिपी भावनाओं को शब्द देती है।


इस ब्लॉग पर आपको जीवन के अलग-अलग रंगों से रंगी कविताएं मिलेंगी —  

प्रेम, विरह, प्रकृति, समाज, प्रेरणा और आत्मा की गहराइयों से निकले शब्द।


**लेखक:**  

मैं शुभम पाठक, एक भावुक कवि और भावनाओं को शब्दों में पिरोने वाला राही।  

यह ब्लॉग मेरे दिल का आईना है — हर कविता मेरे अनुभवों, सोच और संवेदनाओं की झलक है।


अगर आप भी शब्दों की गहराई में डूबना चाहते हैं, तो "Subah Ki Pehli Kiran" आपका स्वागत करता है।


धन्यवाद 🙏

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